26 दिसंबर 2016

वर्ष 2017 में कुछ नई आहटें सुनाई दे रही हैं | कुछ पत्रिकाओं में कहानियां प्रकशित होने की सूचना मिली है |इस वर्ष दो कहानी संकलन आने की खबर हैं |एक जनवरी में और दूसरा अप्रेल – मई तक | हमेशा ही आयोजनों व् आमंत्रणों में जाने से कुछ हिचक होती रही लेकिन पहली बार किसी साहित्यिक आयोजन में भागीदारी करने के आमंत्रण को स संकोच स्वीकारा है |

पिछले तीन वर्ष घनघोर यात्राओं में गुज़रे | अनजाने में ही सही , यात्राएं लिखने  की पूर्व तैयारी होती हैं , बल्कि हर नई यात्रा दिमाग में एक नयी किताब बनकर खुलती है |तीन वर्ष की मेहनत और देश विदेश की यात्राओं ( अनुभवों )का लेखा जोखा हैं ये किताबें जिन्हें ‘’कहानी’’होने से पूर्व डायरी रूप में लिखा गया| गाँव की छुटपुट यात्राओं से लेकर अपने शहर ,कस्बों व् विदेश यात्राओं तक कुछ ऐसे अनुभव हुए जो असोचे , अनोखे व् अभूतपूर्व थे| जो सिमटती करीब आती दुनिया और समस्त भू मंडल के एक बड़े बाज़ार में तब्दील होते जाने के पुख्ता सुबूत भी थे |बाजार में निरंतर परिवर्तित होते आपसी रिश्ते , प्रेम , घृणा , सामंजस्य देखकर कहीं खुशी हुई कहीं निराशा और कहीं गहरा आश्चर्य और दुःख | ये कहानियाँ इन्हीं रिश्तों व् घटनाओं का समुच्चय हैं | मेरा मानना है कि लेखक स्वयं अपना सबसे बेहतरीन आलोचक और प्रशिक्षक होता है |बशर्ते कि वो अपना आकलन वैचारिक निर्ममता और स्वयं को एक दूसरा व्यक्ति मानकर करे | इस लिहाज से इन संकलनों को लेकर कुछ उत्साहित भी हूँ | लघु पत्रिकाओं के लेखकों के भी अपने पाठक होते हैं  |जो जहाँ हों, कहानियाँ पढ़ते ही नहीं फोन या मेसेज कर उन पर अपनी प्रतिक्रया भी देते हैं | सेल्फ प्रमोशन में गैरहुनरमंद और प्रमोटर विहीन रचनाकारों के लिए यही पाठक गन उनकी पूंजी हैं |कोशिश तो यही की है कि प्रबुद्ध व् सामान्य सभी पाठकों को कहानियों में कोई ज़ल्दबाजी और हडबडाहट महसूस न हो | समाज में ‘’क्या और क्यों’’ सिर्फ इतना ही काफी नहीं बल्कि समाज कैसा होना चाहिए इस पर विचार करना भी हमारा ही काम है|  मुझे खुशी है कि इन दौनों किताबों के ब्लर्ब हिंदी के वरिष्ठ प्रतिष्ठित , चर्चित और मेरे प्रिय रचनाकारों ने लिखना स्वीकार किया |उन्हें और दौनों प्रकाशकों को धन्यवाद |

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