14 अगस्त 2011

सिफ़र



 ना ज़न्म का अंत ,
ना म्रत्यु का आदि .....
फिर क्या है वो रहस्य जो आदमी
दाबे फिरता है मुट्ठी में अपनी
  खोल देती है म्रत्यु जिसे
झाडकर हथेली ..... 

5 टिप्‍पणियां:

  1. गहन चिंतन ..

    स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें और बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें और बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  3. संगीता जी ,विजय जी आपको भी स्वतन्त्रता दिवस की बहुत शुभकामनायें और बधाई ....

    उत्तर देंहटाएं