2 अक्तूबर 2010

चेहरे

कितने चेहरे हैं
आदमी के पास
वक़्त के इस दौर में?
शायद उसे खुद नहीं पता!
बस बदलता रहता है ,
चेहरे पे चेहरा
मुखौटों की शक्ल में!
संबंधों,वक़्त या ओहदे के हिसाब से
या फिर किसी निरीह की
संवेदनाओं व् विवशताओं को
भुनाते '
ताजिंदगी ये खेल
बदस्तूर जारी रहता है!
कितनी महारत हासिल कर ली है उसने
चेहरों की इस अदला बदली में,
कि असली चेहरा खो ही गया है उसका
हैरानी होती है कभी कभी
कि इस
बेवुजूद और अदना सी ज़िन्दगी
के लिए
कितने फितूर
इस क़दर ज़द्दोज़हद?
क्या लगता है उसे
की वुजूद है उसका तब तक!
जब तक नष्ट नहीं हो जाते
धरती पर से
हवा पानी
और चेहरे?

17 टिप्‍पणियां:

  1. कितनी महारत हासिल कर ली है उसने
    चेहरों की इस अदला बदली में,
    कि असली चेहरा खो ही गया है उसका

    या शायद वह खुद अब अपना असली चेहरा भूलने के कगार पर है.
    बेहतरीन अभिव्यक्ति

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  2. मुखौटे, चेहरे,या फिर रंगों से पुती सूरतें.
    आईने आईने का फेर है. :)

    बढ़िया शब्द. बधाई

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  3. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 5-10 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

    कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  4. चेहरे पर छुपे चेहरे का मुखौटा उतार दिया।

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  5. वंदना जी सर्वप्रथम तो मेरे ब्लॉग को पढने और प्रशंशा करने के लिए हार्दिक धन्यवाद....दरअसल ब्लॉग पर अभी नयी कोशिश ही है मेरी! आप जैसे प्रबुध्ध रचनाकारों को पढने का मौका मिलता है ये मेरे लिए खुशो का सबब है.आपकी रचना ''टुकडियां;;अभी पढ़ी..बेहतरीन अभिव्यक्ति...टिप्पणी भेजने में कोशिश के बावजूद सफल नहीं हो सकी इसके लिए माफ़ी चाहती हूँ
    वंदना

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  6. बहुत बहुत धन्यवाद अजय जी
    मेरे ब्लॉग को पढने और सराहने के लिए
    आपकी कुछ रचनाएँ अभी पढ़ी....शानदार....
    वंदना

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  7. क्या लगता है उसे
    की वुजूद है उसका तब तक!
    जब तक नष्ट नहीं हो जाते
    धरती पर से
    हवा पानी
    और चेहरे

    bahut khoobsurri se kahi aapne apni baat.

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  8. नकली चेहरे ढोते लोंग अपना असली चेहरा ही भूल जाते हैं ...
    बहुत सही ...!

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  9. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को |

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  10. सच है आज हर आदमी कई चेहरों के साथ घूमता है और हालात के हिसाब से बदलता रहता है .......
    बहतरीन रचना ...

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  11. आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद्!मेरी कविता के प्रति आपके विचार ही मेरी प्रेरणा हैं !
    vandana

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